आज (15 मार्च 2026) पेरिस में अमेरिका और चीन के शीर्ष आर्थिक अधिकारी मिले हैं। इसका मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच चल रहे ट्रेड वॉर में “ट्रूस” (युद्धविराम) को बनाए रखना और मार्च के अंत में प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाले संभावित बीजिंग समिट के लिए रास्ता साफ करना है।
कौन-कौन मिले?
- अमेरिका की तरफ से: ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर।
- चीन की तरफ से: वाइस प्रीमियर हे लिफेंग।
बैठक OECD हेडक्वार्टर्स, पेरिस में हो रही है – रविवार से शुरू होकर सोमवार तक चलेगी।
किन मुद्दों पर बात हुई?
- अक्टूबर 2025 में बुसान (दक्षिण कोरिया) में ट्रंप-शी के बीच हुए ट्रेड ट्रूस की प्रोग्रेस की समीक्षा। इसमें टैरिफ बढ़ाना रोकना, चीन की रेयर अर्थ (दुर्लभ मिट्टी) और मैग्नेट एक्सपोर्ट एक साल के लिए सस्पेंड, अमेरिकी ब्लैकलिस्ट से चीनी टेक कंपनियों को हटाने जैसी बातें शामिल हैं।
- चीन ने 2025 में 12 मिलियन टन और 2026 में 25 मिलियन टन अमेरिकी सोयाबीन खरीदने का वादा किया था – इसकी कितनी पूर्ति हुई, ये देखा गया।
- अमेरिकी टैरिफ में बदलाव, चीन से रेयर अर्थ और मैग्नेट की सप्लाई, अमेरिकी हाई-टेक एक्सपोर्ट कंट्रोल, और ज्यादा सोयाबीन खरीद जैसे टॉपिक्स पर चर्चा।
नतीजा क्या निकला?
कोई बड़ा ब्रेकथ्रू नहीं हुआ, क्योंकि समय कम था और अमेरिका अभी ईरान वॉर में व्यस्त है। लेकिन दोनों पक्ष ट्रूस को जारी रखना चाहते हैं ताकि टैरिफ दोबारा न बढ़ें। ट्रंप-शी समिट में चीन से ज्यादा बोइंग प्लेन, LNG (तरल गैस), सोयाबीन खरीदने की डील हो सकती है – बदले में अमेरिका कुछ एक्सपोर्ट कंट्रोल ढीले कर सकता है।
बैकग्राउंड
दोनों देशों के रिश्ते अभी भी तनावपूर्ण हैं। अमेरिका ने चीनी “अनफेयर ट्रेड” पर नई Section 301 जांच शुरू की है, जिससे नए टैरिफ आ सकते हैं। चीन ने इसे एकतरफा बताया और जरूरत पड़ने पर जवाबी कदम उठाने की बात कही। फिर भी, दोनों स्थिरता चाहते हैं – खासकर ईरान वॉर, ऑयल प्राइस बढ़ने और होर्मुज स्ट्रेट की टेंशन के बीच।



