हैदराबाद में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में परोसे गए भोजन को लेकर विवाद छिड़ने के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश की 20 प्रतिशत आबादी शाकाहारी है, फिर भी कुछ लोग अपनी पसंद दूसरों पर थोपने की कोशिश करते हैं। उन्होंने एकरूप नागरिक संहिता (यूसीसी) का जिक्र करते हुए कहा कि बहुसंख्यकों के कानून को अल्पसंख्यकों पर थोपने की बात की जाती है, लेकिन भोजन के मामले में अपनी पसंद थोपना अजीब लगता है।
ओवैसी ने भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई विविधता पर जोर देते हुए कहा कि देश में सिर्फ शाकाहारी व्यंजन ही नहीं, बल्कि तरह-तरह के व्यंजन हैं। उन्होंने कहा कि यदि कुछ व्यंजन नहीं परोसे गए तो यह जानना मुश्किल है कि किसे पसंद आया और किसे नहीं। उनका मानना है कि भारत की विविधता को भोजन समेत हर क्षेत्र में प्रदर्शित करना चाहिए।
उन्होंने सरकार के निर्णय को स्वीकार करते हुए भी खेद जताया कि ब्रिक्स सम्मेलन में डिजिटल मुद्रा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा का जिक्र नहीं हुआ, जिसे उन्होंने पहले उठाया था। साथ ही उन्होंने चीन से जुड़े मुद्दों, खासकर उन इलाकों जहां भारतीय गश्त टीम जाती थी और जो कथित तौर पर चीन के कब्जे में हैं, पर चर्चा की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए।
कुल मिलाकर ओवैसी का बयान भोजन विवाद से आगे बढ़कर विविधता, अल्पसंख्यक अधिकारों और राष्ट्रीय हित के मुद्दों को जोड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भोजन की पसंद व्यक्तिगत और सांस्कृतिक है, और इसे विवाद का विषय बनाने की बजाय देश की विविधता को सम्मान देना चाहिए।





