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चुनाव आयोग ने एसआईआर पर मतभेद की खबर खारिज की

चुनाव आयोग ने बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का जवाब दिया, जिसमें कहा गया था कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया पर लिए गए फैसलों पर तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार बिना उनकी जानकारी के लिए गए निर्णयों और जारी आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी।

चुनाव आयोग ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि आयोग एक संवैधानिक निकाय है जो संविधान के अनुच्छेद 324, वैधानिक नियमों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करता है। सभी आधिकारिक आदेश, निर्णय और प्रशासनिक निर्देश पूर्ण कानूनी मंजूरी के साथ जारी किए जाते हैं। सदस्यों द्वारा ड्राफ्ट स्तर पर उठाए गए सवाल या सुझाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य मतदाता अधिकारों की रक्षा करना है।

आयोग ने कहा कि आयुक्तों द्वारा दिए गए सुझाव चुनावी प्रक्रियाओं को और बेहतर बनाने के लिए थे। किसी भी संस्था में अलग-अलग विचार और टिप्पणियां सामान्य बात हैं। ये अंतिम निर्णय लेने से पहले निर्णय-प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। सिर्फ तीन आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी प्रणाली सुधारने के लिए सुझाव देने के लिए अधिकृत है।

चुनाव आयोग ने हाल के महीनों में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के चुनाव सफलतापूर्वक कराए। इसके अलावा लगभग 40 नई पहल और कई चुनावी सुधार भी लागू किए गए। आयोग का कहना है कि ये सभी निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर हमला बोल दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने “वोट चोरी” को भारतीय जनता के खिलाफ अपराध और संविधान पर हमला बताया। अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अभिषेक बनर्जी और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने भी आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आवाज उठाई तथा उनकी बर्खास्तगी की मांग की।

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