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चौथा कलमा तौहीद हिंदी और अरबी में | अर्थ सहित पूरी जानकारी

चौथा कलमा तौहीद हिंदी और अरबी में अर्थ सहित पूरी जानकारी

इस्लाम के छह कलमों में से चौथा कलमा है “कलमा तौहीद” (Kalima Tawheed)। “तौहीद” का मतलब है अल्लाह को एक और बेमिसाल मानना। इस कलमे में अल्लाह की वहदानियत, उसकी बादशाहत, उसकी तारीफ़ और ज़िंदगी-मौत पर उसके इख़्तियार का बयान है। इस पोस्ट में आपको चौथे कलमे का अरबी टेक्स्ट, हिंदी उच्चारण और हिंदी अनुवाद मिलेगा।

चौथे कलमे का अरबी टेक्स्ट

لَآ اِلٰهَ اِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهٗ لَا شَرِيْكَ لَهٗ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، يُحْىٖ وَيُمِيْتُ وَهُوَ حَيٌّ لَّا يَمُوْتُ اَبَدًا اَبَدًا، ذُو الْجَلَالِ وَالْاِكْرَامِ، بِيَدِهِ الْخَيْرُ، وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ

चौथे कलमे का हिंदी उच्चारण (Transliteration)

ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू, लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु, युहयी व युमीतु व हुवा हय्युल ला यमूतु अबदन अबदा, ज़ुल जलालि वल इकराम, बियदिहिल ख़ैरु, व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर।

चौथे कलमे का हिंदी अनुवाद (अर्थ)

“अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए सारी तारीफ़ है। वही ज़िंदगी देता है और वही मौत देता है, और वह ख़ुद हमेशा ज़िंदा है, उसे कभी मौत नहीं आएगी। वह बड़ी शान और बुज़ुर्गी वाला है। उसी के हाथ में सारी भलाई है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर (सक्षम) है।”

यह कलमा अल्लाह की तौहीद के साथ उसकी कुछ ख़ास सिफ़ात (गुणों) को बयान करता है, जैसे बादशाहत, हम्द, ज़िंदगी और मौत देना, हमेशा ज़िंदा रहना और हर चीज़ पर क़ुदरत रखना।

चौथे कलमे की अहमियत

  • यह कलमा अल्लाह के एक होने और उसका कोई शरीक न होने का इक़रार है।
  • इसमें बताया गया है कि हर तरह की बादशाहत और तारीफ़ सिर्फ़ अल्लाह के लिए है।
  • यह याद दिलाता है कि ज़िंदगी और मौत अल्लाह के हाथ में है और सिर्फ़ वही हमेशा ज़िंदा रहने वाला है।
  • इसे पढ़ने से बंदे के दिल में अल्लाह की अज़मत और भलाई पर उसके इख़्तियार का यक़ीन मज़बूत होता है।
  • यह कलमा अल्लाह के ज़िक्र का एक ख़ूबसूरत ज़रिया है।

चौथा कलमा कैसे याद करें और पढ़ें

  • पहले “ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू” वाला हिस्सा याद करें।
  • फिर एक-एक पंक्ति जोड़ते जाएँ: “लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु”, फिर “युहयी व युमीतु…”, और इसी तरह आगे।
  • रोज़ाना थोड़ा-थोड़ा दोहराने से याद करना आसान हो जाता है।
  • अर्थ समझकर पढ़ने से इसका असर दिल पर ज़्यादा होता है।
  • सही उच्चारण के लिए किसी जानकार आलिम या उस्ताद की मदद ज़रूर लें।

निष्कर्ष

चौथा कलमा तौहीद, अल्लाह की वहदानियत और उसकी बड़ी सिफ़ात का बयान है। यह पहले, दूसरे और तीसरे कलमे की बात को आगे बढ़ाता है और हर मुसलमान के लिए इसे अर्थ के साथ समझकर याद करना फ़ायदेमंद है।

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