रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए ईरान युद्ध को एक बड़ा अवसर मान रहे हैं। सीएनएन के एक विश्लेषणात्मक लेख के अनुसार, यह युद्ध पुतिन के लिए संकट के बीच फायदा पहुंचा रहा है, भले ही रूस ने अपने लंबे समय के सहयोगी ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनेई को खो दिया हो (अमेरिका-इजरायल हमलों में मारे गए)।
मुख्य बातें:
- पुतिन ने 9 मार्च 2026 को ट्रंप से फोन पर बात की (दिसंबर 2025 के बाद पहली बातचीत)। चर्चा में ईरान युद्ध को “बहुत महत्वपूर्ण” बताया गया। ट्रंप ने कहा कि पुतिन मध्य पूर्व में “सहायक” होना चाहते हैं, लेकिन यूक्रेन युद्ध खत्म करके वे और ज्यादा मदद कर सकते हैं।
- रूस ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका-इजरायल अभियान की निंदा की और खामेनेई की “हत्या” पर शोक जताया, लेकिन पुतिन ने ट्रंप की व्यक्तिगत आलोचना नहीं की।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं (मार्च अंत तक 150 डॉलर तक पहुंच सकती हैं)। रूस (बड़ा तेल निर्यातक) इससे मुनाफा कमा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट दी, जो पहले की पाबंदियों को नरम कर रही है।
- पुतिन ने अपने सलाहकारों से बैठक में कहा कि ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं के लिए खरीदारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और रूसी आपूर्ति “स्थिर व भरोसेमंद” है।
- रूस ईरान को खाड़ी में अमेरिकी संपत्तियों की खुफिया जानकारी दे रहा है। पुतिन ने सऊदी, यूएई, कतर, बहरीन जैसे मध्य पूर्व नेताओं से संपर्क किया।
- ईरान युद्ध पश्चिमी ध्यान यूक्रेन से हटा रहा है, जहां रूस हमले जारी रखे हुए है। इससे रूसी अर्थव्यवस्था (मुद्रास्फीति और घाटे के बावजूद) तेल की आमदनी से मजबूत हो रही है।
विशेषज्ञों की राय:
- हन्ना नॉटे (जेम्स मार्टिन सेंटर): पुतिन ट्रंप को खुश करके यूक्रेन में अपने लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं।
- सैम ग्रीन (किंग्स कॉलेज लंदन): पुतिन सहयोगी खोने को महत्व नहीं देते; ट्रंप उनके लिए यूरोप पर लिवरेज का सबसे बड़ा स्रोत हैं।
निष्कर्ष: रूस ने ईरान, सीरिया (असद), वेनेजुएला (मादुरो) जैसे सहयोगी खोए हैं, लेकिन पुतिन इस युद्ध को आर्थिक लाभ, पश्चिमी ध्यान भटकाने और ट्रंप से संबंध बनाए रखने के मौके के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे यूक्रेन युद्ध में उनकी स्थिति और मजबूत हो सकती है।