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INS विक्रांत की ताकत: MILAN 2026 में दिखा दम, दूसरे स्वदेशी कैरियर की ओर कदम

भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत देश की आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है। इसे कोचीन शिपयार्ड ने बनाया और 2 सितंबर 2022 को नौसेना में शामिल किया गया। यह लगभग 262 मीटर लंबा है, इसमें 14 डेक हैं और यह एक बार में 8,600 समुद्री मील तक का सफर तय कर सकता है। इसका डिज़ाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।

हाल के महीनों में विक्रांत की मौजूदगी लगातार चर्चा में रही है। फरवरी 2026 में विशाखापत्तनम के तट पर हुए बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास MILAN 2026 का समापन समारोह विक्रांत पर ही आयोजित किया गया, जिसमें 42 जहाज और पनडुब्बियां तथा 29 विमान शामिल हुए। इसमें मित्र देशों के 18 जहाज भी थे, जिससे यह अब तक के सबसे बड़े संस्करणों में से एक बना।

आगे की योजना की बात करें तो नौसेना अपनी तीसरे विमानवाहक पोत की तैयारी को भी गति दे रही है। रिपोर्टों के मुताबिक नौसेना 2026 तक दूसरे स्वदेशी विमानवाहक पोत IAC-2 के लिए सरकारी मंजूरी हासिल करने की कोशिश में है, जिसका विस्थापन विक्रांत जैसा यानी करीब 45,000 टन होगा। इसमें ड्रोन संचालन के लिहाज से डिज़ाइन में बड़े बदलाव की उम्मीद है। इस बात की आधिकारिक पुष्टि के लिए रक्षा मंत्रालय या नौसेना की घोषणाओं पर नज़र रखना ज़रूरी है।

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