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Vande Mataram Law: सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, Owaisi का जवाब जानिए

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में वंदे मातरम से जुड़े एक कानून की चुनौती पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण बात कही। यह कानून वंदे मातरम का सम्मान न करने या गाने से इनकार करने पर सजा का प्रावधान करता है। अदालत ने साफ कहा कि अगर किसी व्यक्ति का विवेक या धार्मिक आस्था उसे यह गीत गाने की अनुमति नहीं देती, तो उसे सिर्फ इसलिए आपराधिक मुकदमे का सामना नहीं करना चाहिए। यह फैसला पुराने बाइजो इमैनुएल मामले पर आधारित है, जिसमें राष्ट्रीय गान न गाने पर भी सम्मान दिखाते हुए चुप रहना ठीक माना गया था।

इस सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने याचिका दायर करने वालों को “नक्सलाइट” कहकर संबोधित किया। असदुद्दीन ओवैसी ने अपने ट्वीट में इस टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विचारों की स्वतंत्रता और असहमति जताने का अधिकार संविधान का हिस्सा है। अदालत में जाकर कानून की वैधता पर सवाल उठाना किसी का मौलिक अधिकार है, और इसे नक्सली करार देना गलत है।

ओवैसी के अनुसार, यह घटना सोच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की याद दिलाती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय गीत कितने छंदों का होगा, यह संसद तय करेगी, लेकिन किसी को जबरदस्ती गाने पर मजबूर नहीं किया जा सकता। इस पूरे मामले से साफ है कि लोकतंत्र में असहमति को सम्मान मिलना चाहिए, न कि उसे आपराधिक ठहराया जाए।

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