जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान रूस से भारत को कृषि निर्यात 13 लाख टन रहा, जो मात्रा में 11% अधिक है। रूसी एजेंसी एग्रोएक्सपोर्ट के अनुसार सूरजमुखी तेल इसका बड़ा हिस्सा रहा, जिसकी कीमत 1.2 अरब डॉलर थी, जबकि कुल निर्यात 1.45 अरब डॉलर का था।
काला सागर बंदरगाहों पर हमलों से कुछ डिलीवरी प्रभावित हुईं। स्थानीय रिपोर्टों ने व्यापारियों के हवाले से कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण भारत जाने वाले सूरजमुखी तेल के 60,000 टन शिपमेंट में देरी हुई। इससे नई दिल्ली को नवंबर के त्योहारी सीजन से पहले पाम तेल की खरीद बढ़ानी पड़ी।
एग्रोएक्सपोर्ट ने कहा कि जनवरी-सितंबर का यह आंकड़ा अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा रहा। इससे पहले 2024 में 2.5 मिलियन टन का रिकॉर्ड था, जब व्यापार 1.7 अरब डॉलर का था।
रूसी राज्य ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने रविवार को कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार इस साल 20% से अधिक बढ़ा है। उन्होंने व्यापार बाधाएं हटाने और संयुक्त उद्यमों के विस्तार की मांग की।
भारत और रूस ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा है। मॉस्को ने भारत से रसायन, बिजली के सामान, चिकित्सा उपकरण, समुद्री भोजन, चाय और मसालों की खरीद भी बढ़ाई है।
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