इज़राइल में 27 अक्टूबर 2026 को मंगलवार शाम मतदान खत्म होने के बाद जारी एग्जिट पोल के मुताबिक 120 सीटों वाली संसद (नेसेट) में किसी भी बड़े राजनीतिक गुट को बहुमत नहीं मिल रहा है। पूर्व आईडीएफ प्रमुख गदी आइज़नकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को 52–53 सीटें और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गुट को 50 सीटें मिलने का अनुमान है। सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी हैं; 2023 में गाजा में हमास के साथ युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला चुनाव है।
चैनल 15 के एग्जिट पोल में नेतन्याहू के गुट को 55 और आइज़नकोट के गुट को 49 सीटें मिलने का अनुमान है। अरब दलों को 17–18 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जिससे सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
चुनाव समिति के आंकड़ों के मुताबिक स्थानीय समयानुसार शाम 8 बजे तक मतदान 74.3% रहा, जो 2022 में इसी समय के 66.3% से अधिक है। समिति के अनुसार यह 1988 के बाद इस समय तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है और पिछले चुनाव के 70.6% के अंतिम आंकड़े को भी पीछे छोड़ चुका है।
एग्जिट पोल पर प्रतिक्रिया देते हुए आइज़नकोट ने कहा कि ये नतीजे नेतन्याहू सरकार के प्रति “पूर्ण अविश्वास” दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ये नतीजे अंतिम रहते हैं तो यह इज़राइल के “ज़ायोनी राष्ट्रीय बहुमत” की जीत है। आइज़नकोट ने कहा कि अनुमान सही साबित होने पर वे तुरंत सरकार बदलने और नया गठबंधन बनाने की कोशिश करेंगे।
नेतन्याहू की लोकप्रियता भ्रष्टाचार के आरोपों, न्यायिक सुधारों के विरोध, युद्ध से जुड़े सवालों और बढ़ती महंगाई के बीच घटी है। चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव से पहले आईडीएफ प्रमुख एयल ज़मीर को नए सैन्य अभियान पर धकेलने की खबर पर पूर्व रक्षा मंत्री अविगडोर लिबरमैन ने देशद्रोह के संदेह में जांच की मांग की है। आधिकारिक नतीजों के बाद सरकार बनाने के लिए लंबी बातचीत की संभावना है, जिसमें नेतन्याहू के दक्षिणपंथी सहयोगी और अरब दल निर्णायक हो सकते हैं।




