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वेस्ट बैंक में इजरायली झंडे: बसने वालों का नया मनोवैज्ञानिक हथियार

वेस्ट बैंक में इजरायली बसने वाले अब सिर्फ नए आउटपोस्ट और सड़कें नहीं बना रहे, बल्कि सैकड़ों इजरायली झंडे लगाकर क्षेत्र को मनोवैज्ञानिक रूप से अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रहे हैं। ये झंडे मुख्य सड़कों पर लगाए जा रहे हैं, जहाँ फिलिस्तीनी रोजाना आते-जाते हैं। इससे परिचित नजारे बदल रहे हैं और स्थानीय लोगों को अपने ही घर में मेहमान जैसा महसूस हो रहा है।

जेनिन और नबुलस के बीच की सड़क पर टैगरीद याह्या जैसी युवतियों को रोज सैकड़ों झंडे दिखते हैं। वे बताती हैं कि पहले एक झंडा, फिर एक आउटपोस्ट और नई सड़कें बनने लगीं। इससे दुख, गुस्सा और बेबसी का भाव पैदा होता है, लेकिन साथ ही अपनी जमीन, यादों और पहचान से जुड़ाव भी मजबूत होता है।

यह दृश्य संप्रभुता की कोशिश है। जब अरबाह गांव के जैतून के पेड़ उखाड़े गए, तो उसी समय बसने वालों ने बाईपास सड़क पर झंडे लगा दिए। फोटोग्राफर फातेन अब्देल हादी कहती हैं कि जून से अगस्त के बीच भूगोल ही बदल गया लगता है। मोबाइल घर और झंडे देखकर लगता है कि उनका अधिकार और अपनी जमीन से जुड़ाव छीन लिया गया है।

अक्टूबर 2023 के बाद यह प्रक्रिया तेज हुई है। बसने वाले और सेना मिलकर नए आउटपोस्ट बना रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार झंडे लगाने का मकसद फिलिस्तीनियों के मन में यह बिठाना है कि इजरायली उपस्थिति स्थायी है और वे खुद अस्थायी हैं। इसका अंतिम लक्ष्य ग्रामीण इलाकों से लोगों को शहरों की ओर धकेलना और पूरे परिदृश्य को बदल देना है।

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